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कभी उजड़े चमन की दास्तान सुनो
कभी उस टूटे दिल का हमदर्द बनो
जो लाखो लीटर तेल डुबाएं डुबाएं
पर एक छोटा सा बाल ना उगा पाएं

जो दिन भर फिरता, मारा मारा
दिल से फीका, हारा हारा
कभी वह खिलता, जब अंधियारा
कोई ना मिलता, जो उसे निहारा

टोपियों की फौज़, है दाखिल, निहाल
जो केवल दिखाए वह अनोखे कुछ बाल
बस पीछे की तरफ, ना आगे दिखाएं
जे दिख भी जाएं, ते समझ ना पाएं

कि आंसुओ ने कितना है उसे डुबोया
उसने हर वक़्त था किस्मत पे रोया
की चलाया गया था दिल पे नोकिला खंजर
क्यों उसी के सर पर दी, ज़मीन यूं बंजर।।