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माना कि दिल ने लढना छोड़ा
तुम्हारी आंखो को पढ़ना छोड़ा
किसी की बातों का बुरा ना माने अब
कि बैर किसिसे नहीं, बस जाने दो अब

कब तक दिल में दीप जलाऊं
तुम भी नहीं चाहती, की मैं कुछ समझाऊं
सोचा ना था कि ऐसा दिन आएगा
कि दिल टूट जाएगा, दिल टूट जाएगा

हार चुका है, कण कण मेरा
प्यार का प्यासा, सूख चुका है
सिकुड़ चुका है ये मन मेरा
भूला भी वह भूक चुका है

प्यार ने कैसे कैसों को हराया
प्यार ने सबसे क्या क्या कराया
सीख लो प्यारे, प्यार ना करना
इन लफ़्ज़ों को सुनो, कि आज दिल भर आया